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मैं अनुराग राज हूं आपके सामने संविधान का अनुच्छेद 1 लेकर आया हूं l आज की इस ब्लॉक पोस्ट में हम समझेंगे संविधान का Article 1 क्या कहता है l
ये संविधान की फोटो है संविधान का पहला पेज है और इसके आगे की हम चर्चा करेंगे संविधान के अनुच्छेद एक की इससे पहले की मैं आपको संविधान का अनुच्छेद एक बताऊं
संविधान में कितने अनुच्छेद हैं?
मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा की हमारे संविधान के 395 आर्टिकल हैं टोटल कुल अनुच्छेदों की संख्या अगर देखी जाए तो लगभग 470 के आसपास है लेकिन फिर भी अगर लिखित रूप में हम नंबरिंग काउंट करते हैं तो 395 Article है
संशोधनों का असर
अगर हम अपने इस 70 से 75 साल की संविधान की यात्रा को देखें तो अब तक 105 बार संशोधन हो चुका है जिससे यहां पर कुछ अनुच्छेद जोड़े गए हैं और कुछ अनुच्छेद संविधान से हटाए गए तो इस वजह से जो टोटल आर्टिकल का नंबर लगभग 470 के आसपास है|
अनुच्छेद 1 का परिचय
अनुच्छेद एक में यह कहा गया कि इंडिया यानी भारत राज्यों का संघ होगा | जो हमारे देश “भारत” की पहचान और उसकी संघीय संरचना को परिभाषित करता है। यह अनुच्छेद बताता है कि भारत क्या है, और उसमें कौन-कौन से राज्य और क्षेत्र सम्मिलित हैं।
भारत अर्थात इंडिया
“भारत अर्थात् इंडिया” एक प्रसिद्ध कथन है, जिसे अक्सर यह समझाने के लिए प्रयोग किया जाता है कि “भारत” और “इंडिया” दोनों एक ही देश के दो नाम हैं, लेकिन इन दो नामों के पीछे भिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भावनात्मक अर्थ होते हैं।
1. भारत (Bharat):
“भारत” नाम वैदिक काल से जुड़ा है।
यह नाम राजा भरत के नाम पर रखा गया, जो एक महान और न्यायप्रिय शासक थे।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भी लिखा है: “India, that is Bharat…”
“भारत” शब्द भारत की सांस्कृतिक, पारंपरिक और आत्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है।
2. इंडिया (India):
“इंडिया” नाम यूनानी और अंग्रेज़ी स्रोतों से आया है, जो ‘सिंधु’ नदी (Indus River) से जुड़ा है।
यह नाम ब्रिटिश शासन और आधुनिक राजनीतिक-प्रशासनिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है।
“इंडिया” का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक होता है।
सार:
“भारत अर्थात् इंडिया” का आशय यह है कि दोनों नाम एक ही राष्ट्र के हैं — एक परंपरा से जुड़ा, तो दूसरा आधुनिकता और वैश्विक पहचान से। दोनों मिलकर देश की पूर्ण पहचान बनाते हैं।
अनुच्छेद 1 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण अनुच्छेद है जो भारत को एक गणराज्य के रूप में परिभाषित करता है। इसमें कुल तीन धाराएँ (Clauses) हैं:
1. धारा (1): “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का एक संघ होगा।”
यह धारा भारत की राजनैतिक पहचान को परिभाषित करती है। इसमें “राज्यों का संघ” शब्द भारत को एक संघीय संरचना प्रदान करता है, लेकिन इसे पूरी तरह संघीय नहीं बल्कि अर्ध-संघीय (quasi-federal) माना जाता है।
2. धारा (2): “राज्य ऐसे होंगे जो पहले अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं।”
इस धारा के अनुसार, भारत के राज्य और संघ क्षेत्र संविधान की पहली अनुसूची (First Schedule) में वर्णित हैं।
3. धारा (3): “संसद, विधि द्वारा— किसी राज्य का निर्माण कर सकती है, सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है, राज्य का नाम बदल सकती है, आदि।”
यह संसद को अधिकार देता है कि वह नए राज्य बना सकती है, राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है या नाम बदल सकती है।
भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
भारत एक संघीय गणराज्य है जिसमें दो प्रमुख प्रशासनिक इकाइयाँ हैं: राज्य और केंद्र शासित प्रदेश। प्रत्येक का अपना शासन ढांचा होता है।
भारत के राज्य (भारत में कुल 28 राज्य हैं):
राज्यों के पास अपनी विधानसभाएँ होती हैं और वे कुछ मामलों में स्वतंत्र रूप से कानून बना सकते हैं। प्रमुख राज्य हैं:
1. आंध्र प्रदेश
2. अरुणाचल प्रदेश
3. असम
4. बिहार
5. छत्तीसगढ़
6. गोवा
7. गुजरात
8. हरियाणा
9. हिमाचल प्रदेश
10. झारखंड
11. कर्नाटक
12. केरल
13. मध्य प्रदेश
14. महाराष्ट्र
15. मणिपुर
16. मेघालय
17. मिज़ोरम
18. नागालैंड
19. ओडिशा
20. पंजाब
21. राजस्थान
22. सिक्किम
23. तमिलनाडु
24. तेलंगाना
25. त्रिपुरा
26. उत्तर प्रदेश
27. उत्तराखंड
28. पश्चिम बंगाल
भारत के केंद्र शासित प्रदेश (कुल 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं):
केंद्र शासित प्रदेश सीधे भारत सरकार के नियंत्रण में होते हैं, हालांकि कुछ में विधानसभाएँ भी होती हैं। ये हैं:
1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
2. चंडीगढ़
3. दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव
4. दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
5. लक्षद्वीप
6. पुडुचेरी
7. लद्दाख
8. जम्मू और कश्मीर
संविधान सभा में नामकरण की बहस
संविधान सभा में भारत के नाम “भारत” या “इंडिया” को लेकर महत्वपूर्ण बहस हुई थी, जिसे नामकरण की बहस कहा जाता है। यह बहस मुख्य रूप से 18 सितंबर 1949 को हुई थी, जब संविधान सभा में अनुच्छेद 1 के प्रारूप पर चर्चा हो रही थी।
बहस का मुख्य विषय:
अनुच्छेद 1(1):
“India, that is Bharat, shall be a Union of States.”
(हिंदी में: “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का एक संघ होगा।”)
प्रमुख तर्क और विचार:
1. “भारत” को प्राथमिक नाम रखने का समर्थन:
कई सदस्यों का मानना था कि “भारत” हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान है।
सेठ गोविंद दास और राम सहाय जैसे सदस्यों ने आग्रह किया कि “इंडिया” एक औपनिवेशिक नाम है और “भारत” को प्रमुखता दी जानी चाहिए।
कुछ ने यह भी कहा कि संविधान में केवल “भारत” लिखा जाना चाहिए, न कि “इंडिया”।
2. “इंडिया” को बनाए रखने के पक्ष में तर्क:
डॉ. बी. आर. अंबेडकर और संविधान सभा के कई अन्य सदस्यों ने संतुलन बनाए रखने की बात कही।
“इंडिया” नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त था और उस समय की विश्व व्यवस्था में भारत की पहचान इसी नाम से थी।
इसीलिए “India, that is Bharat” का समझौता किया गया – ताकि दोनों नामों को संवैधानिक मान्यता मिल सके।
निष्कर्ष – अनुच्छेद 1 का महत्व
इसी तरह का राज्यों का संघ एक अमेरिका का भी है अमेरिका के राज्यों का जो संघ है वहां की जितने राज्य वो अमेरिका के एक हिस्से हैं समूह में एक साथ मिले हुए हैं भारत में भी ऐसा ही है हमारा पूरा एक देश है और हमारे देश में 28 राज्य और आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं लेकिन अमेरिका और भारत वाले में अंतर है अमेरिका वाले जो राज्य हैं वो एक समझौते के माध्यम से जुड़े हैं हमारे देश के राज्यों का आपसी राज्य से केंद्र सरकार से कोई समझौता नहीं है मतलब उत्तर प्रदेश का दिल्ली की सरकार से कोई समझौता नहीं है वो पुरी तरह से
भारत का हिस्सा है और केंद्र सरकार जो चाहेगा वही राज्यों में लागू किया जाएगा अलग-अलग नहीं है दूसरी बात कभी भी ऐसा नहीं हो सकता है अमेरिका की तरह की भारत का कोई राज्य भारत को छोड़कर अलग हो जाए जैसे किसी दिन मैन लीजिएगा मैन कर जाए केरल को या तमिलनाडु को या उड़ीसा को या उत्तर प्रदेश नए राज्य बनेंगे तो ऐसा कटाई पॉसिबल नहीं है की वो भारत संघ को छोड़कर दूसरी जगह पे चला जाए ये ए विनाशी जो राज्य उनका संघ कहलाता है जिसका नाम है भारत भारत का कोई भी क्षेत्र भारत को छोड़कर भारत से अलग नहीं हो सकता है यही वजह है की हमारा संघ अमेरिका के संग से
पुरी तरह से अलग माना जाता है और ये खास बात भी है की भारत को एक साथ जोड़कर रखने का कम हमारा संविधान का अनुच्छेद एक करता है ये समझता है भारत की बाउंड्री की भारत की सीमाओं को बताता है और आज आप देख रहे हो भारत की राजधानी का नाम नई दिल्ली है और वो सब का प्री है और इसी तरह से बना रहे इसमें अगर कोई और जो पॉइंट बचा है तो वो हम अगले वीडियो के अगले पार्ट में यानी की अनुच्छेद दो में क्लियर करेंगे अगर आपको वीडियो पसंद आया है तो प्लीज जाने से पहले वीडियो को एक बार लाइक करेंगे और हमारे सब्सक्राइब नहीं किया तो सब्सक्राइब
भी कर लीजिएगा सारा डिटेल आपको यहां पे मिलने वाला है मुझे दीजिएगा फिर मिलूंगा कल से टाइम अगले आर्टिकल लेकर तब तक के लिए टाटा बाय
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Nice
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